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मूत्र रोग से ग्रसित गर्भवती महिला Pregnant woman having the urinary disease



गर्भवती स्त्री को मूत्र (पेशाब) से सम्बन्धित रोग हो जाना (Excessive salivation during pregnancy)


गर्भावस्था के समय (गर्भकाल के दौरान) गर्भवती स्त्री को मूत्र (पेशाब) से सम्बन्धित अनेक रोग हो जाते हैं जैसे- पेशाब का अपने आप निकल जाना, पेशाब का जल्दी-जल्दी आना, पेशाब का रुक जाना, अधिक गाढ़ा पेशाब आना, जिसमें अंडे के समान धातु आने लगता है। इस रोग के हो जाने के कारण गर्भवती स्त्री को बहुत अधिक कमजोरी आ जाती है तथा उसके हाथ-पैर और पूरे शरीर में सूजन हो जाती है जिसके कारण स्त्री का गर्भपात हो जाता है।
गर्भवती स्त्री को मूत्र (पेशाब) से सम्बन्धित रोग हो जाने पर प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

गर्भवती स्त्री को पेशाब से सम्बन्धित रोग होने पर सबसे पहले एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए और इसके साथ-साथ पानी भी पीते रहना चाहिए।
गर्भवती स्त्री को अधिक भूख लग रही हो तो उसे उसी भोजन का सेवन करना चाहिए जो जल्दी पचने योग्य (लायक) हो।
गर्भवती स्त्री को पेशाब से सम्बन्धित रोग होने पर गर्म पानी से स्नान करना चाहिए और सुबह-शाम को मेहनस्नान करना चाहिए।
इस रोग से पीड़ित गर्भवती को रात के समय में भोजन करने के बाद अपने पेड़ू (नाभि से नीचे) पर मिट्टी की गीली पट्टी का लेप करना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने से गर्भवती स्त्री के पेशाब से सम्बन्धित रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं।

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